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भारत के राष्ट्रपति | Indian Polity in Hindi

भारत में, राष्ट्रपति राष्ट्र का प्रमुख होता है और उसे पहला नागरिक माना जाता है। हमारे देश में  राष्ट्रपति एकता, अखंडता और एकजुटता का प्रतीक है। हमारे देश  में राष्ट्रपति  को कभी-कभी एक भारतीय परिवार के दादा के रूप में भी संदर्भित किया जाता है, जहां पिता निर्णय लेते हैं लेकिन इसे अमल में लाने  के लिए दादाजी की मंज़ूरी  होनी जरुरी है । इसी तरह, भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में प्रधान मंत्री और दोनों सदन एक निर्णय लेते हैं लेकिन अंत में केवल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर ही इसको लागु कर सकते हैं। राष्ट्रपति के बारे में जानने के लिए बहुत सारे रोचक तथ्य और जानकारी हैं, जिन पर हम चर्चा करने जा रहे हैं। तो चलिए रोल करते हैं।  

यह विषय भारत के राष्ट्रपति के बारे में है। इस लेख में आप चुनाव प्रक्रिया, नियुक्ति, वेतन, शक्तियां, विशेष शक्तियां, त्यागपत्र, योग्यता, और अन्य महत्वपूर्ण चीजों  के बारे में जानने वाले हैं। अंतिम  भाग में हम उन 50 सबसे अधिक बार पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नों पर चर्चा करेंगे जो पिछली परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, RPSC, RSSB, RSMSSB, आदि में पूछे गए थे।

विषयसूची (Index)

इस लेख में हम निचे दिए गए सभी विषयों को कवर करने जा रहे हैं। यदि आप एक छात्र हैं और किसी भी परीक्षा के लिए यह विषय सीखना चाहते हैं, तो इसे अंत तक जरूर पढ़े । परीक्षा में आने वाले हर छोटी से छोटी बारीकी  को बहुत आसान तरीके से समझाया गया है ।

  1. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए योग्यता।
  2. राष्ट्रपति के कार्यालय के लिए शर्तें।
  3. राष्ट्रपति का चुनाव।
  4. राष्ट्रपति की शपथ।
  5. राष्ट्रपति की शक्तियाँ।
  6. भारत में राष्ट्रपति का कार्यकाल।
  7. महाभियोग प्रक्रिया
  8. महत्वपूर्ण Whatsapp के और facebook के भारतीय राज्य व्यवस्था के समूह ।
  9. 10 सबसे महत्वपूर्ण भारतीय राज्य व्यवस्था के सवाल (इन्हे रट लो)।

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए योग्यता

राष्ट्रपति की चुनाव प्रक्रिया में पात्र होने के लिए, उम्मीदवार को नीचे दिए गए मानदंडों को पूरा करना जरुरी है।

  • उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • आयु सीमा न्यूनतम 35 वर्ष है
  • लोक सभा के चुनाव के लिए योग्य होना चाहिए।
  • उम्मीदवार के पास संघ सरकार या किसी अन्य सरकारी निकाय के तहत लाभ का कोई कार्यालय नहीं होना चाहिए।
  • उम्मीदवार को RBI में 15,000 रुपए की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी
  • राष्ट्रपति के चुनाव के लिए एक व्यक्ति के नामांकन के लिए, न्यूनतम 50 निर्वाचकों को प्रस्तावक होने की आवश्यकता होती है।

राष्ट्रपति के कार्यालय के लिए शर्तें

राष्ट्रपति के कार्यालय की कुछ शर्तें हैं

  • राष्ट्रपति को संसद या किसी राज्य विधायिका के सदन का सदस्य नहीं होना चाहिए।
  • राष्ट्रपति को लाभ का कोई अन्य कार्यालय नहीं रखना चाहिए।
  • राष्ट्रपति अपने आधिकारिक निवास (राष्ट्रपति भवन) के उपयोग के लिए किराए का भुगतान किए बिना ही हकदार है। 
  • उनके पद और भत्ते को उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी परिस्थिति में कम नहीं किया जा सकता है।

राष्ट्रपति का चुनाव

राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष नहीं होता है। इसके बजाय, राष्ट्रपति एक निर्वाचक मंडल द्वारा निर्वाचित होता है जो निम्न से मिलकर बना होता हे

  1. संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य
  2. राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
  3. सभी केंद्र शासित प्रदेश (जिनमे विधानसभा होती हे) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।

* किसी भी विधानसभा के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।

राष्ट्रपति के चुनाव में एक विधायक के वोट का मूल्य:

= (राज्य की कुल जनसंख्या / MLA की कुल संख्या) x (1/100)

राष्ट्रपति के चुनाव में एक सांसद के वोट का मूल्य:

= (सभी राज्यों के विधायकों के वोटों का कुल मूल्य / MP की कुल संख्या))

राष्ट्रपति की शपथ

राष्ट्रपति को पद की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है और यदि वह इस समय उपस्थित नहीं होता है, तो उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश राष्ट्रपति को  शपथ दिलाते हैं।

शपथ में राष्ट्रपति ने निम्न चीज़ो की शपथ ली -

1 ईमानदारी से कार्यालय को निष्पादित करना।

2 संविधान और कानून का संरक्षण, रक्षा और बचाव करना।

3 भारत के लोगों की सेवा और कल्याण के लिए खुद को समर्पित करना।

राष्ट्रपति की शक्तियाँ

भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रपति की शक्तियाँ कुछ इस प्रकार हैं।

1 राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियां

सरकार की कोई भी कार्यवाही जो निष्पादित की जा रही है, आधिकारिक तौर पर भारत के राष्ट्रपति के नाम से की जाती है। संक्षेप में वह हमारे देश के "सांकेतिक प्रमुख" हैं ।

भारत के राष्ट्रपति सरकार में प्रमुख व्यक्तियों की नियुक्ति करते हैं जैसे - प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री के सुझाव पर मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य, भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, भारत के महान्यायवादी (AGI) , भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG), UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) के अध्यक्ष और सदस्य और EC (चुनाव आयोग), राज्यपाल, और वित्त आयोग के सदस्य।

भारत का राष्ट्रपति संघ के मामलों के बारे में कोई भी जानकारी मांग सकते  है और प्रधानमंत्री से कानून बनाने का प्रस्ताव कर सकते है।

2 राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां

भारत का राष्ट्रपति संसद के सत्रों को बुला सकते है या उसे भंग कर सकते है। उन्हें लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र बुलाने की शक्ति भी प्राप्त है।

वह लोकसभा को भंग कर सकते  है यदि सदन की सबसे बड़ी पार्टी अपना बहुमत खो देती है और बहुमत साबित नहीं कर पाती है।

भारत के राष्ट्रपति के पास राज्य सभा में 12 सदस्यों और लोकसभा में 2 आंग्ल-भारतीय सदस्यों को मनोनीत करने की शक्ति है।

कोई भी धन विधेयक और राज्य पुनर्गठन विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद में प्रस्तावित नहीं किया जा सकता है।

जब संसद सत्र में नहीं होती है, तब राष्ट्रपति अध्यादेश लागु कर सकता है या अध्यादेश वापस ले सकता है, जिसे 6 सप्ताह में संसद द्वारा पारित करना होता है। वीटो शक्तियों का विवरण हमने निचे विस्तार से किआ है ।

3 राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियाँ

राष्ट्रपति संसद में किसी को वार्षिक वित्तीय विवरण पढ़ने के लिए कहते हैं जिसे हम आम तौर पर केंद्रीय बजट के रूप में जानते हैं लेकिन याद रखें कि "बजट" शब्द का उल्लेख हमारे संविधान में नहीं है।

वह किसी भी आपदा से उबरने के लिए भारत की आकस्मिक निधि से धन की अग्रिम निकासी कर सकता है।

वह राज्य और केंद्र सरकार के बीच राजस्व वितरण की निगरानी के लिए प्रत्येक 5 वर्षों में एक वित्त आयोग बनाता है। 

4 राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियाँ

राष्ट्रपति कानून के किसी भी मामले पर सर्वोच्च न्यायालय से कोई सलाह मांग सकते हैं अनुछेद 143 के तहत ।

राष्ट्रपति के पास माफी देने या किसी भी अपराध के दोषी व्यक्ति की सजा को बदलने की शक्तियां हैं।

और यह हम पहले ही चर्चा कर चुके हैं, की राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते है।

अनुच्छेद 72 के अनुसार, राष्ट्रपति के पास क्षमा देने या किसी भी अपराध के दोषी किसी भी व्यक्ति की सजा को बदलने की शक्तियां हैं।

5 राष्ट्रपति की राजनयिक शक्तियां

राष्ट्रपति अंतर्राष्ट्रीय मंचों और मामलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह राजदूतों की नियुक्ति।

6 राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियाँ

वह सभी सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर है।

वह सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मचारियों के प्रमुख की नियुक्ति करता है।

वह युद्ध की घोषणा कर सकता है या संसद की सलाह पर शांति का प्रस्ताव रख सकता है।

7 राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियाँ

राष्ट्रपति निम्न अनुछेदो के अनुसार आपातकाल की घोषणा कर सकता है

अनुच्छेद 352: युद्ध या किसी सशस्त्र विद्रोह के मामले में राष्ट्रीय आपातकाल।

अनुच्छेद 356: राज्यपाल की सलाह पर राज्य में राष्ट्रपति शासन।

अनुच्छेद 360: वित्तीय आपातकाल जब हमारे राष्ट्र की अखंडता पर कोई संकट आये।

8 राष्ट्रपति की वीटो शक्ति

शाब्दिक शब्दों में, वीटो का मतलब "अस्वीकार करने का अधिकार" है। भारत के राष्ट्रपति को 3 प्रकार की वीटो शक्तियाँ प्राप्त हैं

  1. आत्यंतिक वीटो - राष्ट्रपति संसद द्वारा पारित विधेयक को अपनी मंजूरी रोक सकता है। तब बिल समाप्त हो जाएगा और यह अधिनियम नहीं बनेगा।
  2. निलम्बनकारी वीटो - राष्ट्रपति इस वीटो शक्ति का उपयोग कर के एक बिल को अस्वीकृत कर सकता है और इसे संसद के पुनर्विचार के लिए वापस कर सकता है। लेकिन अगर संसद से यह बदलकर या बिना किसी संशोधन के वापस आता है तो राष्ट्रपति इसे पारित करने के लिए बाध्य होता है।
  3. पॉकेट वीटो - राष्ट्रपति बिल को न तो मंजूरी देता है और न ही अस्वीकृत करता है, बल्कि वह बिल को अनिश्चित काल के लिए लंबित अवस्था में रखता है।

9 राष्ट्रपति की अध्यादेश बनाने की शक्ति

राष्ट्रपति संसद के सत्र में न होने पर अध्यादेश (लागू) कर सकता है या हटा सकता है, जिसे अनुच्छेद 123 के अनुसार 6 सप्ताह में संसद द्वारा पारित किया जाना होता है। यह एक अधिनियम के रूप में ही काम करता है लेकिन एक अस्थायी कानून के रूप में गिना जाता है। संसद 6 सप्ताह से पहले भी इस अध्यादेश को समाप्त कर सकती है।

भारत में राष्ट्रपति का कार्यकाल

कार्यालय का कार्यकाल = 5 वर्ष

वह उपराष्ट्रपति को त्यागपत्र सोपता है।

पुन: निर्वाचित किया जा सकता है = अनंत बार

महाभियोग की प्रक्रिया

अनुच्छेद 61 के अनुसार, राष्ट्रपति को 5 साल के अपने नियमित कार्यकाल से पहले महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है। महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने के लिए आरोप लगाने वाले सदन के 1/4  सदस्यों के हस्ताक्षर की आवश्यकता है।

जब प्रक्रिया शुरू हो जाती हे, तब महाभियोग प्रक्रिया को मंजूरी देने के लिए उस सदन के 2/3 सदस्यों की मंजूरी आवश्यकता होती है। जब यह आरोप लगाने वाले सदन के 2/3 सदस्यों द्वारा पारित किया जाता है, तो यह संसद के दूसरे सदन में चला जाता है। और दूसरे सदन में फिर से प्रस्ताव पारित करने के लिए 2/3 सदस्यों की आवश्यकता होती है।

यदि यह दोनों सदनों द्वारा सफलतापूर्वक पारित हो जाता है केवल तब ही राष्ट्रपति को हटाया जा सकता है।

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10 most repeated important Indian polity questions in hindi

Q1 भारत में राष्ट्रपति का चुनाव कैसे किया जाता है

उत्तर: प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा

Q2 किस मतदान प्रणाली के माध्यम से भारत का राष्ट्रपति चुना जाता है।

उत्तर: सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम

Q3 राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के प्रस्तावक होने के लिए आवश्यक निर्वाचकों की न्यूनतम संख्या है

उत्तर: प्रस्तावक के रूप में 50 निर्वाचकों की आवश्यकता है।

Q4 भारत के किसी राज्य का मुख्यमंत्री राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने के लिए पात्र नहीं है यदि -

उत्तर: वह राज्य विधानमंडल के ऊपरी सदन के सदस्य हैं।

Q6 भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में राष्ट्रपति के रूप में चुनाव के लिए योग्यता तय की गई है?

उत्तर: अनुच्छेद 58 (1)

Q7 भारत के राष्ट्रपति किसे  अपना इस्तीफा  सोपते है?

उत्तर: भारत के उपराष्ट्रपति को

Q8 भारत के राष्ट्रपति को उनके पद से हटाया जा सकता है

उत्तर: महाभियोग प्रक्रिया द्वारा

Q9 संसद के किस सदन द्वारा, महाभियोग राष्ट्रपति पर लगाया जा सकता है?

उत्तर: संसद के किसी भी सदन द्वारा।

Q10 भारतीय संविधान का कौन सा अनुछेद भारतीय राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया से संबंधित है।

उत्तर: अनुच्छेद 61

 

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भारत के राष्ट्रपति | Indian Polity in Hindi

भारत के राष्ट्रपति | Indian Polity in Hindi

Created By : Er. Nikhar

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uploaded on: 01-06-2020


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